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जैन धर्म की एकता और सर्व धर्म सद्भाव का ऐतिहासिक दीपोत्सव मनाया गया
मुहता जी जैन तीर्थ पर दीपों की जगमगाहट से सजी रात, भक्तों ने अनुभव किया अद्भुत आत्मिक सुख
जोधपुर। कार्तिक अमावस्या की दीपावली की पावन रात्रि पर जोधपुर में एक ऐसा आध्यात्मिक और भव्य दीपोत्सव मनाया गया, जिसने शहर को आस्था के प्रकाश से सराबोर कर दिया। मुहता जी जैन तीर्थ पर भगवान महावीर स्वामी के 2552 वें निर्वाण कल्याणक के उपलक्ष्य में आयोजित इस महा-दीपोत्सव में हज़ारों दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा।
रात ठीक 9 बजे, श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से दीप प्रज्वलित करना शुरू किया, और देखते ही देखते यह एक जनसैलाब में बदल गया। जो आयोजन कुछ लोगों की पहल से शुरू हुआ था, वह पलक झपकते ही एक विशाल और दिव्य रूप ले चुका था। मुहता जी जैन तीर्थ का भव्य प्रांगण चारों ओर रखे हज़ारों दीपों की रोशनी से इस तरह जगमगा उठा, मानो स्वर्ग का एक टुकड़ा स्वयं पृथ्वी पर उतर आया हो, और यह दृश्य देखकर लगा मानो पावापुरी स्वयं मुहता जी मंदिर तीर्थ में समा गई हो।
इस मंगलमयी रात्रि की सबसे मनमोहक विशेषता यह रही कि दीपों की रोशनी केवल जैन मंदिर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसके उजालों ने विष्णु मंदिर और हनुमान मंदिर को भी अपनी आभा से सराबोर कर दिया। यह सर्वधर्म सद्भाव का एक अनूठा और ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ आस्था की ज्योति ने विभिन्न धर्मों के प्रतीकों को एक साथ प्रकाशित किया।
समिति के अध्यक्ष संजय मेहता ने इस अद्भुत जनसमूह और ऊर्जा की सराहना करते हुए बताया कि यह आयोजन सामुदायिक एकता और आत्मिक उत्थान का पर्व साबित हुआ। सचिव पवन मेहता के अनुसार, भक्तों को इस दौरान अद्भुत आत्मिक और धार्मिक सुख की अनुभूति हुई।
साध्वी अमितगुणा, साध्वी पीयूषपूर्णा, एवं साध्वी प्रशांतपूर्णा श्रीजी के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ यह दीपोत्सव वास्तव में ऐतिहासिक बन गया। उन्होंने सभी मुहता परिवार के लाभार्थियों , सहयोगियों और उपस्थित श्रद्धालुओं का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री मुहता जी मंदिर भविष्य में भी समाज को जोड़ने वाले ऐसे भव्य और प्रेरणा दायक आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।
साध्वी ने आगे बताया कि दीपावली की इस रात्रि में प्रज्वलित प्रत्येक लौ ने न केवल माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद और समृद्धि प्रदान की, बल्कि प्रभु महावीर स्वामी के विशेष मोक्ष (निर्वाण) कल्याणक का आशीर्वाद भी दिया। 2552 दीपों की यह सामूहिक ऊर्जा और प्रकाश संपूर्ण समाज की एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक बनी। यह दीपोत्सव जैन धर्म की एकता और सर्वधर्म सद्भाव का एक ऐसा अविस्मरणीय संदेश दे गया, जो जोधपुर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।

















