जून में 103 ई-मित्र धारकों का आकस्मिक निरीक्षण, ओवरचार्जिंग, गाइडलाइन का उल्लंघन और फर्जीवाड़े के मामलों में हुई कार्रवाई
आमजन से ऑनलाइन पावती रसीद लेने और अधिक राशि लेने वालों की शिकायत करने की अपील, विभाग ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी
जोधपुर। जिले में ई-मित्रों के खिलाफ सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीओआईटी) की कार्रवाई जारी है। जून 2025 में जोधपुर जिले में प्राप्त हो रही शिकायतों के संबंध में डीओआईटी ने 103 ई-मित्र धारकों का आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें 18 ई-मित्र धारकों पर कार्रवाई की गई।
ऑल इंडिया समुराई फेडरेशन ने जापान के मार्गदर्शन में किया आयोजन, देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने लिया भाग, जिले से महिपाल सिंह भाटी ने किया नेतृत्व
मनोज यादव ने बताया- समुराई खेल को खेल मंत्रालय में शामिल कराने के लिए प्रयासरत, छात्रों ने अनुशासन और समर्पण का किया प्रदर्शन
परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों के नाम:
24 साल की महिला ने छोड़ा पति, भतीजे संग रचाई शादी; 3.5 साल की बेटी अब पिता के साथ रहेगी
जमुई जिले (बिहार) में घटी हैरान करने वाली घटना, चाचा ने भी दी शादी को हरी झंडी
हवाई हमले और आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रिल और जन जागरूकता कार्यक्रम जारी
7 मई से अब तक 29 मॉक ड्रिल और 79 जन जागरूकता कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं
जयपुर/जोधपुर। राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) के कमांडेंट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में एसडीआरएफ की तैनाती को और मजबूत किया गया है। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बालोतरा और फलोदी जैसे सीमावर्ती जिलों में एसडीआरएफ की 15 टीमें पहले से ही तैनात हैं। इनके अलावा, जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर और उदयपुर स्थित एसडीआरएफ कम्पनी मुख्यालयों पर 26 रेस्क्यू टीमें अलर्ट मोड पर हैं, जो किसी भी आपदा या अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
* विद्याग्राम इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, राधास्वामी बाग, चौमू (जयपुर)
* ताज होटल, आमेर (जयपुर)
* दिल्ली पब्लिक स्कूल, आर.के. पुरम (कोटा)
* आदित्य टेक्नो सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेवर (भरतपुर)
* होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र (उदयपुर)
* कृष्णा कोचिंग सेंटर (अजमेर)
* मथुरा दास माथुर अस्पताल, शास्त्री नगर (जोधपुर)
* सैटेलाइट अस्पताल (बीकानेर)
राज्य के सीमावर्ती जिलों में तैनात हैं SDRF की 15 टीमें, 13 मई को 10 जगहों पर आयोजित हुए मॉक ड्रिल और जन-जागरूकता कार्यक्रम
एसडीआरएफ टीमों ने हवाई हमले के दौरान होने वाली स्थिति से निपटने के लिए किया अभ्यास, नागरिकों को सुरक्षा उपायों के बारे में बताया
जोधपुर/जयपुर। राज्य आपदा प्रतिसाद बल (एसडीआरएफ) राजस्थान ने राज्य में आपदाओं के लिए तैयार रहने के लिए व्यापक अभ्यास शुरू कर रखा है। एसडीआरएफ कमांडेंट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, बीकानेर, बाडमेर, जैसलमेर, जोधपुर, बालोतरा, फलोदी में एसडीआरएफ की 15 टीमें तैनात हैं। इसके अलावा एसडीआरएफ कम्पनी मुख्यालयों जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर पर 26 रेस्क्यू टीमें अलर्ट मोड पर हैं, जो किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने हेतु तैयारी हालत में है।
1. रामेश्वरम पब्लिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, लालचन्दपुरा, निवारू रोड (जयपुर)
2. 4th आर०ए०सी०, बटालियन मुख्यालय, चैनपुरा (जयपुर)
3. रेल्वे स्टेशन कापरेन (बून्दी)
4. ग्राम गुडली, केशोरायपाटन (बून्दी)
5. गृह रक्षा प्रशिक्षण केन्द्र (भरतपुर)
6. गुरू गोविन्द सिंह सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, चेतक सर्किल
(उदयपुर)
7. ग्राम मुहामी (अजमेर)
8. एन०आई०एफ०टी० कॉलेज, करवड (जोधपुर)
9. पी०एम० श्री अमर शहीद सागरमल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (जैसलमेर)
10. ग्राम उदारामसर (बीकानेर)
मॉक ड्रील में हवाई हमले के दौरान रेस्क्यू टीमों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही क्षतिग्रस्त भवनों को सुरक्षित करना, घायलों को क्षतिग्रस्त इमारतों से बाहर निकालना एवं प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल भिजवाना इत्यादि का अभ्यास किया गया तथा जन-जागरूकता कार्यक्रम में हमले के दौरान आमजन द्वारा स्वयं एवं परिजनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाये की जानकारी दी गई। हवाई हमले /आपदा के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों एवं आपदा की स्थिति में की जाने वाली राहत एवं बचाव तकनीकों की जानकारी दी गई। जिसमें नागरिकों को बेसिक लाइफ सपोर्ट तकनीकों जैसे चोट लगने पर प्राथमिक उपचार करने, हमले/आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त भवनों से सुरक्षित बाहर निकलने एवं उपलब्ध संसाधनों की सहायता से स्ट्रेचर तैयार करने तथा कार्डियक अरेस्ट होने पर सीपीआर द्वारा कृत्रिम श्वसन देकर बचाव करने जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
केरू आदर्श स्कूल से शुरू हुई शोभायात्रा गांव के प्रमुख स्थलों से होती हुई पुनः वहीं आकर संपन्न हुई, जिसमें शामिल हुए प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और समाजसेवी।
धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम
जोधपुर। रविवार को रामनवमी के पावन पर्व पर केरू गांव में अद्भुत और भव्य रामनवमी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा में भाग लेकर भगवान राम के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा का प्रदर्शन किया। शोभायात्रा की शुरुआत केरू आदर्श स्कूल से हुई और श्रीराम स्कूल, मुख्य बाजार, संस्कृत स्कूल और रामद्वारा होते हुए पुनः आदर्श स्कूल पर आकर समापन हुआ।
राजपुरोहित समाज ने 2025 के खेतेश्वर जयंती महामहोत्सव की कमान संभाली
माणकसिंह नारनाडी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष नियुक्त
जोधपुर में हुई बैठक, भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार
"सुबह से शाम शीतला माता के नाम" कार्यक्रम में भजन, होरिया और शीतल पेय का वितरण
जोधपुर में जांगिड़ पंचायत ने किया भक्ति-सेवा कार्यक्रम का आयोजन
जोधपुर। शहर में शीतलाष्टमी के पावन पर्व पर धार्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। नागोरी गेट, कागा तीर्थ रोड स्थित शीतला माता मंदिर में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। इसी अवसर पर श्री विश्वकर्मा जांगिड़ स्वर्गाश्रम व प्याऊ परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री विश्वकर्मा जांगिड़ पंचायत के तत्वावधान में आयोजित "सुबह से शाम शीतला माता के नाम" कार्यक्रम में भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला।
जयपुर में आयोजित सेमिनार में देहदान का बताया महत्व, युवाओं को जागरूक करने का आह्वान
वरिष्ठ पत्रकार ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भी करवाया है पंजीकरण
जयपुर। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राकेश वशिष्ठ ने समर्पण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित एक सेमिनार में 101वीं बार रक्तदान कर एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। इस सेमिनार का विषय था देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान। डॉ. वशिष्ठ ने इस अवसर पर इन महान कार्यों के महत्व पर प्रकाश डाला और समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. वशिष्ठ के विचार:सेमिनार में बोलते हुए डॉ. वशिष्ठ ने कहा, "दुनिया में देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। ये दान किसी मानव को जीवनदान देने समान है।" उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद शरीर को दाह-संस्कार या दफनाने के बजाय शोध और चिकित्सा के लिए दान किया जा सकता है जिससे गंभीर बीमारियों के इलाज के नए तरीके खोजे जा सकते हैं। नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि दी जा सकती है और ब्रेन डेड होने पर अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने रक्तदान के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है, इससे कोई कमजोरी नहीं होती।
101वाँ रक्तदान और अंगदान:डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने 101वीं बार रक्तदान किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में पहले ही देहदान और अंगदान के लिए पंजीकरण करवाया हुआ है और अब तक कई लोगों को इसके लिए प्रेरित भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे सेमिनार आयोजित करने चाहिए ताकि समाज में देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आगे आकर लोगों को जागरूक करें और रक्तवीर, देहदानी और अंगदानी समाज के लिए प्रेरणा हैं।
15 एकड़ में फैला भव्य मंदिर, 51 फीट ऊंची भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र
कायस्थ समाज के लिए आध्यात्मिक व सामाजिक विकास का केंद्र बनेगा शक्तिपीठ
जोधपुर। वृन्दावन (उत्तर प्रदेश) ब्रजभूमि की यह पावन नगरी, अपनी प्राचीनता और 5000 से अधिक मंदिरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बांके बिहारी, राधारमण, रंगनाथ जैसे मंदिरों के अलावा, अब एक और आध्यात्मिक स्थल ने इस शहर की धार्मिक धरोहर में नया अध्याय जोड़ा है–श्री चित्रगुप्त शक्तिपीठ लगभग 15 एकड़ में फैले इस भव्य परिसर का निर्माण श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद, पशुपतिनाथ महाराज के सान्निध्य में किया जा रहा है।



