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25,000 स्वयंसेवकों ने 145 स्थानों पर निकाले पथ संचलन, समाज में जागरूकता फैलाने का लिया संकल्प

समाज को जागरूक करने की दिशा में उठाये कदम- विजय कुमार

जोधपुरराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का 11 दिवसीय शताब्दी वर्ष महोत्सव रविवार को भव्य समारोह के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर एक ही दिन में 44 स्थानों से पथ संचलन निकाले गए, जिसमें स्वयंसेवकों ने अनुशासन का परिचय देते हुए कदम से कदम मिलाते हुए चलकर समाज में एकता और जागरूकता का संदेश दिया।

पथ संचलन में 5 से 80 वर्ष तक के बुजुर्गों ने भी भाग लिया, जो इस कार्यक्रम की विविधता और व्यापकता को दर्शाता है। रास्ते में लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। दशहरा के दिन शुरू हुए इस महोत्सव में कुल 145 स्थानों से पथ संचलन निकले, जिसमें लगभग 25,000 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे मसूरिया, चांदपोल बस्ती, सरदारपुरा नगर, महेश बस्ती, लाला लाजपत राय कॉलोनी, बागर बस्ती, महाराणा प्रताप मैदान गोलनाडी और झालामंड पर समारोह का आयोजन किया गया।

चांदपोल बस्ती का मुख्य समारोह गौर मैदान में शाम 5 बजे आयोजित हुआ। अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख विजय कुमार, रामद्वारा से संत अमृतराम महाराज व सर संघ चालक देवीलाल जी मंचासीन थे। इस समारोह के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि "हिंदू समाज के संगठन की यात्रा की शुरूआत में लोगों ने उपेक्षा और उपहास किया, लेकिन आज इस ईश्वरीय कार्य को स्वीकार्यता मिली है। यह सभी स्वयंसेवकों के कठिन परिश्रम का परिणाम है। हम सभी को समाज को जगाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए हिन्दू पुनरुत्थान करना है।"

समारोह के बाद निकला पथ संचलन माता का कुंड, रामेश्वर मंदिर, विद्याशाला और चांदपोल के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः गौर मैदान पहुंचकर संपन्न हुआ। पथ संचलन के मार्ग पर रंगोली और ध्वजा पताकाएं सजाई गईं, जबकि चांदपोल टैक्सी स्टैंड के पास आतिशबाजी और पुष्प वर्षा से पथ संचलन का भव्य स्वागत किया गया।

आतिशबाजी और पुष्प वर्षा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन का भव्य स्वागत
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मामे खान ने अपने नवीनतम ट्रैक के माध्यम से थार रेगिस्तान की जीवंतता और लोक संस्कृति को आधुनिक संगीत से जोड़ा

“बंजारा झूम” में परंपरा और आधुनिकता का अनोखा मिश्रण, जोधपुर की सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत चित्रण

जोधपुर। राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार मामे खान ने एक बार फिर अपने सुरों से मरुधरा की मिट्टी की खुशबू दुनिया तक पहुंचाई है। उनका नया गीत “बंजारा झूम” एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक और ऊर्जा से भरपूर उत्सव है, जो राजस्थान की आत्मा को सजीव करता है।

इस गीत को विशेष रूप से राजस्थान और ब्लू सिटी जोधपुर को समर्पित किया गया है। “बंजारा झूम” में थार रेगिस्तान की रंगीन लय और लोक संस्कृति की गहराई को आधुनिक संगीत के साथ जोड़ते हुए, नृत्य, वास्तुकला और व्यंजनों जैसी क्षेत्रीय विशेषताओं का सुंदर चित्रण किया गया है। इसमें जोधपुर के सर्वकालिक पसंदीदा मिर्चीबड़ा सहित स्थानीय जीवन की झलक देखने को मिलती है।

क्लासिक लोकगीत “चम-चम चमके चूंदड़ी” से प्रेरित इस ट्रैक में मामे खान ने पारंपरिक मांगणियार लोकधुनों को वैश्विक बीट्स के साथ मिलाकर एक नया संगीत अनुभव रचा है। उनकी कर्णप्रिय आवाज और एजे रैप्स के आधुनिक प्रोडक्शन का मेल “बंजारा झूम” को एक ऐसा गीत बना देता है जो एक साथ पारंपरिक भी है और आधुनिक भी।

यह गीत न केवल संगीत का आनंद देता है, बल्कि राजस्थान की लोक आत्मा, संस्कृति और समुदाय की एकता का संदेश भी बखूबी प्रस्तुत करता है। मामे खान के इस प्रयास से न केवल राजस्थान की संस्कृति को एक नई पहचान मिलती है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।

“बंजारा झूम” के रिलीज होते ही इसे सोशल मीडिया पर भी काफी सराहा जा रहा है। लोग इस गीत के माध्यम से राजस्थान की धड़कन को महसूस कर रहे हैं और इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मान रहे हैं।

मामे खान का नया ट्रैक निश्चित रूप से संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास स्थान बनाएगा और राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर पेश करेगा।
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11 अक्टूबर को होने वाले इस पाटोत्सव में महा आरती और भजन संध्या का आयोजन

धार्मिक उत्सव के साथ महाप्रसादी का विशेष आयोजन 

जोधपुरश्री परशुराम महादेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा 11 अक्टूबर, शनिवार को भव्य पाटोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक समारोह श्री 108 शांतेश्वरजी महाराज, गादीपति श्री अजनेश्वर धाम, तथा महंत रामप्रसाद महाराज के सान्निध्य में आयोजित किया जाएगा।

ट्रस्ट के सदस्य सत्यप्रकाश बोहरा ने बताया कि इस पाटोत्सव में श्रद्धालुओं के लिए अनेक विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।

पाटोत्सव का कार्यक्रम:

दोपहर 12:30 बजे रूद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रमुख आचार्य पंडित विजयदत्त पुरोहित होंगे।

* मुख्य यजमान के रूप में कपिल व्यास का योगदान होगा।

* शाम 6:30 बजे फूल मण्डली और महाआरती का आयोजन होगा। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का विशेष आयोजन किया जाएगा।

* इसके पश्चात, रात 7 बजे से श्याम मण्डली के हैणसा और उनकी टीम द्वारा भजन संध्या का कार्यक्रम भव्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

परशुराम महादेव मंदिर का यह पाटोत्सव जोधपुर के सिवांची गेट के पास श्री अजनेश्वर आश्रम के परिसर में होगा। समारोह को लेकर ट्रस्ट और सर्व ब्राह्मण महासभा, जोधपुर ने सभी धर्मप्रेमियों से सपरिवार पधारने का आग्रह किया है।
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गांधी और कालियार परिवार की ओर से मसुरिया में हुई आध्यात्मिक संध्या

श्री महेश सुन्दर काण्ड भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत हुआ संगीत मय सुन्दरकाण्ड पाठ

जोधपुरशहर के धार्मिक माहौल को और भी आध्यात्मिक बनाने के लिए, गांधी और कालियार परिवार द्वारा एक विशेष आयोजन किया गया। "एक शाम बालाजी के नाम" के तहत श्री महेश सुन्दर काण्ड भजन मंडली द्वारा भव्य सुन्दर काण्ड पाठ और भजन संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 4 अक्टूबर 2025, शनिवार को रात 9:30 बजे से शुरू हुआ।

मसुरिया स्थित पंचमुखी बालाजी मंदिर में सभी धर्मप्रेमी और श्रधालुओं ने आध्यात्मिकता की भावना को न सिर्फ बढ़ाया, बल्कि समुदाय में एकता और भाईचारे को भी मजबूत किया।

गांधी परिवार के एक सदस्य ने कहा, "हम सभी मिलकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए तत्पर थे। श्री महेश सुन्दर काण्ड भजन मंडली ने संगीत मय पाठ कर वातावरण को खास बना दिया।"

इस भव्य समारोह में संगीत के साथ सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन हुआ, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय अनुभव रहा। आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यक्रम ना केवल पूजा-पाठ के लिए रहे, बल्कि यह सभी श्रद्धालुओं के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव की तरह भी हो।

समस्त मोहल्लावासियों ने इस आयोजन को सफल बनाने में श्रद्धा भाव से सहयोग दिया। गांधी और कालियार परिवार ने सभी का आभार व्यक्त किया
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1 अक्टूबर को हनुमान चालीसा पाठ और लेजर लाइट शो से हुई शुरुआत, 2 अक्टूबर को रावण दहन और आतिशबाजी के साथ महादेव व्यायाम शाला का अखाड़ा प्रदर्शन, स्वदेशी अपनाने का संदेश

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत होंगे मुख्य अतिथि, बारिश के बावजूद सुचारू रूप से चलेगा आयोजन, शस्त्र पूजन से होगी शुरुआत

जोधपुर दो दिवसीय दशहरा महोत्सव का अगाज 1 अक्टूबर 2025 बुधवार को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर 16 में बहुत उत्साह और धूमधाम से हुआ।

1 अक्टुबर को सांय 7:30 बजे हनुमान चालीसा पाठ से कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ तत्पश्चात भक्ति संगीत के साथ लेजर लाइट शो का आयोजन हुआ। बच्चों ने रावण के साथ सेल्फी लेने का आनन्द उठाया।

गुरुवार 2 अक्टूबर 2025 को रावण दहन और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा साथ ही महादेव व्यायाम शाला के द्वारा अखाड़ा प्रदर्शन रहेगा जिसमे बालिका अखाड़ा के भी हैरत अंगेज करतब रहते हैं।

दशहरा महोत्सव 2025 की विशेषताएं:

रावण दहन: इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण रावण दहन है, जिसमें 55 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।
आतिशबाजी: महोत्सव में लगभग 45 मिनट की आतिश बाजी होगी, जिसमें विभिन्न प्रकार के आतिशबाजी के आइटम शामिल होंगे।
मुख्य अतिथि: इस बार के मुख्य अतिथि भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और राज्यसभा के सांसद राजेंद्र गहलोत महापोर वनिता सेठ, सूरसागर विधायक देवेन्द्र जोशी, शहर विधायक अतुल भंसाली, शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेन्द्र पालीवाल सहित और भी अतिथिगण सम्मिलित होंगे।
स्थानीय भागीदारी: इस महोत्सव में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता समिति के सदस्य मिलकर रावण के पुतले का निर्माण करते हैं।
बारिश के बावजूद आयोजन: इस महोत्सव का एक विशेष पहलू यह है कि यह आयोजन बारिश के बावजूद भी सुचारु रूप से चलता रहता है, और रावण का पुतला सीना तान कर खड़ा रहता है ।

दशहरा महोत्सव 2025 के अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा, संयोजक राजेशरूप राय व कमलेश श्रीपत, उपाध्यक्ष शैलेश जैन, महासचिव जुगलकिशोर सोलंकी, सचिव लोकेश भाटी व मेला प्रभारी योगेश दईया हैं।

कार्यक्रम का समय:

* शस्त्र पूजन कार्यक्रम: सांय 6:30 बजे दशहरा मैदान मे शस्त्र पूजन का आयोजन नन्दन मयूर सेवा समिति द्वारा किया जाएगा।
पुतले का दहन: शाम को 7:30 बजे के करीब होगा।
आतिशबाजी: लगभग 45 मिनट तक चलेगी।

इस दशहरा महोत्सव में इस वर्ष स्वदेशी अपनाओ देश को बढ़ाओ का संदेश दिया जाएगा दशहरा महोत्सव मे हर वर्ष अलग अलग संदेश दिया जाता है यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है और इस महोत्सव मे हर प्रकार से राष्ट्रीय सेवा को भी महत्व दिया जाता है।
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दूसरे दिन भी गरबा रास महोत्सव में उमड़ा जोश, महापौर और अन्य अतिथियों ने किया दीप प्रज्वलन

जोधपुर में गरबा महोत्सव में पुरस्कारों की बौछार, प्रतिभागियों को मिला सम्मान

जोधपुरनगर निगम दक्षिण की ओर से गांधी मैदान में आयोजित गरबा रास महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को भी युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यक्रम की सफलता को चार चांद लगा दिए। गांधी मैदान में आयोजित हुए इस गरबा महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत में महापौर दक्षिण वनिता सेठ, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कमलेश गोयल, अतिरिक्त महाधिवक्ता नाथूसिंह राठौड़, नगर निगम दक्षिण स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर मनीषा डागा, मेला समिति अध्यक्ष मीनाक्षी कोठारी सहित सभी अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलन किया।

इसके बाद गांधी मैदान में शुरू हुआ गरबा महोत्सव का रंग देर शाम तक जमा रहा। शाम 7:00 से ही गांधी मैदान के बाहर गरबा खेलने के लिए लंबी कतारें नजर आईं और युवाओं ने उत्साह के साथ मां के दरबार में हाजिरी लगाई। डीजे की धुन के साथ युवाओं ने कदम ताल करते हुए बेहतरीन अंदाज में गरबा खेला।

इस अवसर पर मेला समिति सदस्य पार्षद पूजा राठी, अलका हरिसिंह पंवार, सावित्री गुर्जर, सुमन सैन, मंजू प्रजापत, पार्षद घनश्याम भाटी, अनिल गट्टाणी, अशोक भाटी, नरेंद्र फिटानी, फतेहराज मांकड़, भाजपा मंडल अध्यक्ष हरिसिंह पंवार, निगम अधिकारी संपत मेघवाल, राहुल गुप्ता, प्रार्थना दहिया, मुमताज, विमला प्रजापति, मुक्ता चौधरी, बेला गहलोत, अंजली राठौड़, अपूर्वा, दीपिका भाटी, कार्यालय अधीक्षक सुबोधशंकर व्यास और समाजसेवी राजेश अग्रवाल सहित शहर के कई प्रबुद्ध जन एवं जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन शैलेष भुरानी ने किया।

गरबा रास महोत्सव के तहत बेहतर गरबा रास करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार भी दिए गए। कार्यक्रम के दौरान बेस्ट पुरुष डांसर, बेस्ट महिला डांसर, बेस्ट कपल और बेस्ट ग्रुप डांस ग्रुप जैसी विभिन्न श्रेणियों में अवार्ड प्रदान किए गए।
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समाज सेवा के भीष्म पितामह रतनलाल गुप्ता (काका) थे मुख्य अतिथि, भारतीय संस्कृति को जिंदा रखने का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं- रतनलाल गुप्ता

गायत्री देवी ट्रस्ट के संस्थापक चंद्रशेखर अरोड़ा और मुख्य संयोजक ललिता वर्मा ने की कार्यक्रम की व्यवस्था, अंकुर माध्यमिक स्कूल में हुआ आयोजन, स्कूल संचालक ने जताया आभार

जोधपुरगायत्री देवी ट्रस्ट द्वारा आयोजित 101 कन्याओं के चरण पूजन महोत्सव का आयोजन चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित अंकुर माध्यमिक स्कूल में किया गया। गायत्री देवी ट्रस्ट के संस्थापक चंद्रशेखर अरोड़ा ने बताया कि कार्यक्रम में कन्याओं के चरण धोए गए और उनकी विधिवत पूजा करके कन्याओं से आशीर्वाद लिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज सेवा के भीष्म पितामह रतनलाल जी गुप्ता (काका) थे। उन्होंने अपने संबोधन ने बताया कि भारतीय संस्कृति को जिंदा रखने का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता उन्होंने कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की और गायत्री देवी ट्रस्ट को लगातार अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक ललिता वर्मा थी। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को सैंडविच पेस्ट्री गिफ्ट फ्रूट दिए गए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से चंद्रशेखर अरोड़ा, चंद्रप्रकाश आसेरी (अध्यक्ष), विनती जांगिड़ (अध्यक्ष), रक्षिता बाफना (महासचिव), राजेश भाटिया (संगठन महामंत्री) और गायत्री देवी ट्रस्ट की पूरी कार्यकारिणी और टीम उपस्थित थीं। कार्यक्रम के अंत में अंकुर माध्यमिक स्कूल के संचालक रोहित अरोड़ा ने पधारे हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और गजेंद्र सिंह शेखावत सहित संतों और गणमान्य अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति जोधपुर के कारीगरों का विशेष आभार

प्रकट ब्रह्म स्वरूप महंत स्वामी महाराज ने की अध्यक्षता, छीतर पत्थर से निर्मित मंदिर स्थापत्य और शिल्प कला का अद्वितीय उदाहरण, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भक्तिमय हुआ वातावरण

जोधपुर सूर्यनगरी के कालीबेरी स्थित स्वामिनारायण संप्रदाय के सबसे भव्य अक्षरधाम मंदिर का विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और लोकार्पण समारोह अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मंत्रोच्चारण, कीर्तन व भजनों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

समारोह में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार वैष्णव और गजेंद्र सिंह शेखावत विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। इनके साथ-साथ राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस विनीत माथुर, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, पाली सांसद पीपी चौधरी, स्थानीय विधायक अतुल भंसाली, देवेंद्र जोशी, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, उपमहापौर श्री कृष्ण लड्डा और शिक्षाविद निर्मल गहलोत की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
समारोह की अध्यक्षता प्रकट ब्रह्म स्वरूप महंत स्वामी महाराज ने की, जिनके सान्निध्य में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और लोकार्पण सम्पन्न हुआ। उन्होंने मंदिर निर्माण में जुटे जोधपुर के कारीगरों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और इसे सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बताया। जोधपुर की प्रसिद्ध छीतर पत्थर से निर्मित यह भव्य मंदिर स्थापत्य और शिल्प कला का अद्वितीय उदाहरण है।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वामिनारायण संप्रदाय के कीर्तन से हुई, जिसमें प्रमुख संत श्वेत प्रकाश स्वामी, ज्ञानानंद स्वामी, योगीप्रेम स्वामी और अक्षरप्रेम स्वामी सहित कई संतों ने प्रवचन और भक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।

जस्टिस विनीत माथुर ने इस अवसर पर कहा कि यह मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बनेगा, बल्कि जोधपुरवासियों की आस्था और संस्कृति को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर का उद्देश्य पूर्ण हुआ है और यह जोधपुर वासियों के लिए गर्व की बात है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, "इस भव्य मंदिर की स्थापना धर्म और संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करेगी। यह न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि संस्कृति की चेतना को भी उजागर करने वाला स्थल बनेगा।"
रेल मंत्री अश्विनी कुमार वैष्णव ने भारत के गौरवशाली अतीत और आर्थिक, सांस्कृतिक पुनरुत्थान की बात करते हुए कहा कि “हम जिस मानसिक गुलामी से अब उबर रहे हैं, यह मंदिर उस चेतना का प्रतीक है जो हमें फिर से आत्मविश्वासी भारत की ओर ले जा रही है।”

मंदिर परिसर में विशाल पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, जहां स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से सभी व्यवस्थाओं को संभाला। इस अवसर पर भव्य सत्संग, प्रवचन, भजन संध्या और विशेष आरती के आयोजन भी किए गए। लोकार्पण समारोह के साथ जोधपुर की सांस्कृतिक धरोहर में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।

यह नया स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर आने वाले समय में न सिर्फ आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा, बल्कि मारवाड़ और समग्र राजस्थान में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आधार भी बनेगा।
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चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर 16 दशहरा मैदान में युवा सदस्यों की मेहनत से सज रहा है दशहरा महोत्सव का मंच

समिति के सदस्यों ने मध्य रात्रि तक किया रावण का पुतला तैयार करने का कार्य

जोधपुरनन्दन मयूर सेवा समिति द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव 2025 की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर 16 स्थित दशहरा मैदान में इस महोत्सव को भव्य रूप देने के लिए समिति के युवा सदस्य दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

हर वर्ष की तरह, इस बार भी समिति के सदस्य रावण के विशाल पुतले का निर्माण कर रहे हैं, जो कि इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण होगा। युवा सदस्यों ने बताया कि वे मध्य रात्रि तक इस पुतले को तैयार करने में जुटे हुए हैं, ताकि यह पुतला दर्शकों को आकर्षित कर सके और दशहरा महोत्सव की भव्यता को बढ़ा सके।

समिति के अध्यक्ष ने कहा, "हम हर साल इस महोत्सव को और भी भव्य बनाने का प्रयास करते हैं। रावण का पुतला हमारी मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि इस बार का दशहरा महोत्सव पहले से भी ज्यादा शानदार हो।"

समिति के युवा सदस्यों की मेहनत और उत्साह से यह स्पष्ट है कि दशहरा महोत्सव 2025 एक यादगार अनुभव बनेगा। सभी स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे इस महोत्सव में भाग लें और इसे सफल बनाएं।
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बैंड-बाजों और राजस्थानी धुनों से सजी मेहमानों की आगवानी, पहली बार सीजन में पहुंची ट्रेन

फूल मालाओं और पारंपरिक स्वागत से सैलानियों में खुशी का माहौल

जोधपुरपैलेस ऑन व्हील शाही ट्रेन का भव्य आगमन हुआ। इस विशेष ट्रेन के पहुंचने पर मेहमानों का स्वागत बैंड-बाजों और राजस्थानी धुनों से किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना।

पैलेस ऑन व्हील, जो अपनी शानदार यात्रा के लिए प्रसिद्ध है, इस सीजन में जोधपुर पहुंची है। यहां मेहमानों का स्वागत राजस्थानी लोक धुन "केसरिया बालम पधारो म्हारे देश" के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने अपने अद्वितीय प्रदर्शन से सैलानियों का मन मोह लिया।

फूलों की मालाओं से सजी आगवानी और पारंपरिक बैंड-बाजों की धुनों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस भव्य स्वागत को देखकर सैलानी बेहद प्रसन्न दिखाई दिए। जोधपुर की संस्कृति और विरासत की झलक इस स्वागत समारोह में देखी गई, जिसने मेहमानों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया।

पैलेस ऑन व्हील की यह यात्रा ऊंचाई के अलावा, असाधारण सेवा और सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है। इस सीजन का यह पहला फेरा है, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

जोधपुर की संस्कृति और आतिथ्य का यह अनूठा उदाहरण पैलेस ऑन व्हील के मेहमानों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा। आने वाले समय में इस तरह की और भी यात्राओं से जोधपुर में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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पूर्व नरेश गज सिंह जी करेंगे पूजा, शराब साथ लाने और पीकर आने वाले दर्शनार्थियों का प्रवेश निषेध, पॉलिथीन बैग में प्रसाद लाना मना

जयपोल और फतेहपोल से होगा प्रवेश, महिला व पुरुषों के लिए अलग-अलग रास्ते, सीसीटीवी कैमरे से रखी जाएगी नजर, पीने के पानी की होगी व्यवस्था

जोधपुर महरानगढ़ दुर्ग में चामुण्डा माताजी के मंदिर में सोमवार को आसोजी नवरात्रा का प्रारम्भ कुंभ स्थापना के साथ होगा। नवरात्रा में चामुंडा माता मंदिर में दर्शन की व्यवस्था प्रातः 7 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगी।

महाराजा गज सिंह करेंगे चामुंडा माताजी मंदिर में दर्शन व पूजा

महरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासक कर्नल अजय सिंह शेखावत ने बताया कि सतवर्ती पाठ का संकल्प और थापना का मुहूर्त सुबह 12.05 से 12.53 बजे के बीच है। महाराजा गजसिंह व महारानी हेमलता राज्ये इस मुहूर्त के अनुसार मेहरानगढ़ के चामुंडा माता मंदिर में दर्शन करेंगे। 

प्रातः 7:00 से शाम 5:00 बजे तक होगी चामुंडा माता के दर्शन की व्यवस्था

उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी प्रशासन के सुझावानुसार प्रातः 7:00 बजे जयपोल व फतेहपोल के द्वार दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे व शाम 5:00 बजे तक दर्शनों की व्यवस्था रहेगी। पूरे नवरात्रा के दौरान यही व्यवस्था रहेगी। जयपोल के बाहर से ही एक पंक्ति में लाईनों की व्यवस्था की गई जो मंदिर तक रहेगी तथा डी.एफ.एम.डी. गेट से ही जयपोल व फतेहपोल से दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पट्टे पर महिलाओं, बच्चों एवं वृद्धजनों के लिये आने-जाने की व्यवस्था की गई है वह वहीं से जायेगे और वहीं से आयेगे। इसी प्रकार पुरुषों एवं युवाओं के लिये सलीम कोट से होते हुए बसन्त सागर से आने-जाने की व्यवस्था की गई है।

मुहूर्त अनुसार थापना

श्री चामुण्डा मंदिर के बसंत सागर के पास नौ वेदपाठी ब्राह्मण स्थापना 22 से 30 सितंबर तक दुर्गापाठ का वाचन करेंगे। नवरात्रा के अंतिम दिन से पूर्व होमाष्टमी की रात हवन प्रारंभ किया जायेगा जिसकी पूर्ण आहुति 1 अक्टूबर नवमी को प्रातः 11.15 से 11.50 बजे के बीच में महाराजा गजसिंह एवं महारानी हेमलता राज्ये द्वारा की जायेगी व महाराजा गज सिंह की तिलक आरती प्रातः 11.51 से 12.01 तक व नवमी को प्रातः 12.05 से 12.15 के बीच थापना जी के उत्थापना का मुहूर्त होगा।

महिला व पुरुषों के प्रसाद चढ़ाने की अलग-अलग व्यवस्था

दर्शन करने आने वाली महिलाओं के लिए नारियल बड़ा करने की व्यवस्था पट्ठे पर की गई है और पुरुषों के लिए बसंत सागर के पास की गई है। मेहरानगढ़ म्यूजियम प्रबंधन व प्रशासन द्वारा यह अनुरोध है कि दर्शनार्थी अपने साथ पानी वाले नारियल के स्थान पर गोटे वाला प्रसाद लेकर आए जिससे उन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं हो। व्यवस्था के तहत चामुंडा माता की मूर्ति का दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में परिक्रमा वर्जित रहेगी। 

पॉलिथीन में प्रसाद लाना मना होगा

नवरात्रा के दौरान पॉलिथीन में प्रसाद लाना मना होगा, साथ ही दर्शनार्थियों से निवेदन रहेगा कि वह कैरी बैग (हैंगिंग बैंग व थेले) इत्यादि अपने साथ नहीं लावे। 

शराब पीकर आना व साथ लाने पर प्रवेश नहीं

प्रशासन के निर्देशानुसार नवरात्रा के दौरान दर्शनार्थियों को शराब साथ लाने व शराब पीकर आने पर प्रवेश नहीं मिलेगा।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरे व कंट्रोल रूम

मेहरानगढ़ दुर्ग में नवरात्रा के दौरान जयपोल से चामुंडा माताजी मंदिर परिसर तक अलग-अलग स्थानो पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जो विभिन्न स्थानों पर दर्शनार्थियों की सुविधा और व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखेंगे,इसके साथ ही कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई है जहां से महिला और पुरुष दर्शनार्थियों को दर्शन के निर्देश पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर दिए जाएंगे।

पीने के पानी की सुविधा

दर्शनार्थियों के लिए पीने के पानी की प्याऊ की व्यवस्था जयपोल के बाहर डेढ कंगूरा पोल के पास, महिलाओं के लिए पट्ठे पर, पुरुषों के लिए सलीम कोट मैदान पर की गई है। उन्होंने बताया कि बिजली की व्यवस्था सभी स्थानों पर सुनिश्चित कर दी गई है तथा जनरेटर की भी व्यवस्था रहेगी जो पूरे 24 घंटे रहेगा और बिजली कर्मियों की नियुक्ति भी निर्देश अनुसार कर दी गई है। मेहरान गढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के सुरक्षाकर्मी भी स्थान स्थान पर अपनी ड्यूटी देंगे तथा प्रशासन व पुलिस के कर्मचारियों के साथ सहयोग करेंगे।

एंबुलेंस व फायर ब्रिगेड की रहेगी व्यवस्था
 
प्रशासन की ओर से एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की व्यवस्था भी की जा रही है जो जयपोल के बाहर तैनात रहेगी। महरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की एंबुलेंस ऊपर पट्ठे पर तैनात रहेगी। चिकित्सा विभाग व महरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की तरफ से डॉक्टर व कंपाउंडर नवरात्रा के दौरान सभी आवश्यक उपकरण एवं मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था के साथ उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर लिफ्ट सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
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श्रद्धालुओं ने अद्भुत श्रद्धा के साथ अपने पूर्वजों को दी श्रद्धांजलि, 21 सितंबर को अमावस्या पर होगा निःशुल्क तर्पण कार्यक्रम

भूतनाथ मंदिर सेवा समिति ने तर्पण के लिए की विशेष तैयारियाँ, आचार्य पं. अजय हर्ष करेंगे संचालन

जोधपुरभूतनाथ मंदिर सेवा समिति द्वारा भूतनाथ मंदिर सरोवर में आयोजित पितृ तर्पण कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को चतुर्दशी का तर्पण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

समिति के नरेन्द्र बोहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि आश्विन कृष्ण अमावस्या, जो कि मोक्षदायिनी अमावस्या के रूप में मानी जाती है, 21 सितंबर रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन पितरों को विदाई देने का विशेष तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

भूतनाथ सरोवर में रविवार को तीन पारियों में निःशुल्क तर्पण कराया जाएगा। यह तर्पण क्रमशः सुबह 7:30 बजे, 8:30 बजे और दोपहर 12:00 बजे आचार्य पं. अजय हर्ष के आचार्यत्व में सम्पन्न होगा। समिति द्वारा समुचित व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी बाधा के तर्पण कर सकें।

समिति ने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर आचार्य पं. अजय हर्ष एवं अन्य सहयोगियों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी रहेगी।

भूतनाथ मंदिर सेवा समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर सम्मिलित होकर पितृ तर्पण का लाभ लेने की अपील की है।

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72 वर्षीय दूल्हा स्टानिस्लाव और 27 वर्षीय दुल्हन अनहेलीना ने भारतीय परंपरा का किया सम्मान, हिंदू रीति-रिवाजों से लिए सात फेरे

तीन साल के लिव-इन रिश्ते के बाद, जोड़े ने पारंपरिक विवाह का चुना मार्ग

जोधपुरराजस्थान का जोधपुर एक बार फिर से एक विदेशी मेहमानों की शाही शादी का गवाह बना है। इस बार, यूक्रेन के निवासी स्टानिस्लाव और अनहेलीना ने भारतीय रीति-रिवाजों को अपनाते हुए हिंदू वैदिक संस्कारों के तहत विवाह किया। यह कपल पिछले तीन-चार साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था, लेकिन भारतीय परंपराओं की खूबसूरती ने उन्हें पारंपरिक तरीके से विवाह करने के लिए प्रेरित किया।

72 वर्षीय दूल्हा स्टानिस्लाव और 27 वर्षीय दुल्हन अनहेलीना का यह शादी समारोह सूर्यनगरी जोधपुर में सम्पन्न हुआ। यह उनकी पहली यात्रा थी भारत की, और भारतीय रस्मों एवं सांस्कृतिक धरोहरों को देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुए।

अनहेलीना ने कहा, "हमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं की गहराई ने छू लिया। इस देश के रीति-रिवाजों में जो प्रेम और सम्मान है, वह हमें बहुत भाया।" वहीं, दूल्हा स्टानिस्लाव ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा, "यह शादी हमारे लिए न केवल एक समारोह है, बल्कि यह हमारी प्रेम कहानी का एक नया अध्याय भी है।"

यह शादी जोधपुर के एक भव्य होटल में आयोजित की गई, जहां भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। पारंपरिक मेहंदी, हल्दी और संगीत समारोह ने इस शादी को और भी खास बना दिया। 

सामाजिक कार्यक्रमों के अंतर्गत, स्टानिस्लाव और अनहेलीना ने भारतीय विद्या के अनुसार वेदों की परिक्रमा की और एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। विशेष रूप से, दूल्हा-दुल्हन ने अपने परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया, जिन्होंने इस अनोखे समारोह में भाग लिया।

इस शादी ने न केवल जोधपुर की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी साबित किया कि प्रेम और परंपराएं सभी सीमाओं से परे होती हैं। जोधपुर फिर से साबित कर रहा है कि यह न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान है जहां जीवन के खास पल जीने के लिए विदेशी मेहमान आते हैं।

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जोधपुर में आयोजित भव्य कार्निवाल ने दिखाया समाज की एकता और उल्लास का अद्वितीय नजारा

विभिन्न खेलों और आकर्षक पुरस्कारों के साथ सफलता पूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रम, समाज के वरिष्ठजनों की भागीदारी रही महत्वपूर्ण

जोधपुर। श्री अग्रवाल पंचायत द्वारा आयोजित श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के अंतर्गत रविवार को अग्रवाल कार्निवाल का भव्य आयोजन श्री अग्रसेन वाटिका प्रांगण में हुआ। इस आयोजन ने समाज के बच्चों, युवतियों, महिलाओं और पुरुषों में जोश और उत्साह का संचार किया, जो सुबह से देर रात तक बना रहा।

प्रातः 10 बजे पंचायत अध्यक्ष मुकुल गुप्ता, सचिव अनिल अग्रवाल, मुख्य अतिथि विष्णु मित्तल और विशिष्ट अतिथि हीरालाल मोदी ने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्निवाल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष मुकेश सिंहल ने सभी अग्रजनों का स्वागत करते हुए बम्पर इनामों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान हर 30 मिनट में ड्रा निकाला जाएगा, जिसमें बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के लिए तीन वर्ग बनाए गए थे।

जयंती संयोजक चमन अग्रवाल ने कहा कि कार्निवाल का आयोजन श्री अग्रसेन वाटिका प्रांगण में किया गया, जहाँ सुबह 11 बजे से ही भीड़ उमड़ पड़ी। वाटिका प्रांगण खचाखच भरा रहा और अग्रवाल कार्निवाल संयोजक अनिल आर. सिंहल व सह-संयोजक रवि गुप्ता ने सभी खेलों के नियम और संचालन की जिम्मेदारी संभाली।

कार्यक्रम में बच्चों के लिए 'रंगीन दुनिया', 'होशियार कंगारू', 'आमने-सामने', महिलाओं के लिए 'टोपी पहनाके' और पुरुषों के लिए 'ये हाथ मुझे दे दे दे' जैसे अनोखे खेल आयोजित किए गए। कपल गेम 'आ गले लग जा' विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे खेलते हुए प्रतिभागी और दर्शक दोनों ही आनंदित हुए।

जयंती संयोजक महेंद्र अग्रवाल व प्रमोद अग्रवाल ने समाज के वरिष्ठजनों से 140 से अधिक लक्की कूपन निकलवाए। विजेताओं को चाँदी की ईंट, चाँदी के सिक्के, वॉशिंग मशीन, मिक्सर ज्यूसर, होम थियेटर और स्मार्ट LED TV जैसे शानदार पुरस्कार प्रदान किए गए।

अमित अग्रवाल ने रस्साकशी प्रतियोगिता का संचालन किया, जिसमें महिलाओं और पुरुषों दोनों ने दमखम दिखाया। देर रात आयोजित ब्लास्ट तंबोला में नकद इनामों की बौछार ने समापन को और भी यादगार बना दिया। तंबोला का संचालन राजेश अग्रवाल, विनय मित्तल, श्रेष्ठता बंसल और हितेश अग्रवाल ने किया।

पूरे आयोजन को सफल बनाने में डॉ. मोनिका काला, विकेश गुप्ता, राहुल गुप्ता, लोकेश गुप्ता, रवि सिंहल, अक्षत अग्रवाल, निखिल बंसल, पूजा मंगल, कविता अग्रवाल, डॉ. रुचि अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, कन्नप गोयल, नीरज गोयल, बद्री जलानी, विपिन गुप्ता, सुरेश गुप्ता, ज्योति मंगल, ललित बंसल और रवि सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।

पंचायत कोषाध्यक्ष मुकेश सिंहल ने उत्साह जताते हुए कहा कि आज का दिन समाज की एकता, उमंग और परंपराओं के संगम का प्रतीक है। जयंती संयोजक चमन अग्रवाल ने कहा कि अग्रवाल कार्निवाल ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है तो हर आयोजन उत्सव का रूप ले लेता है।
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श्री श्रीविद्या अनुष्ठान केन्द्र में ज्योतिषाचार्य पण्ड़ित पूर्णेंदु व्यास करा रहे हैं तर्पण, पितरों को तृप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम: प्रवक्ता भानु कुमार दवे

पवित्र शम्भू-सागर की जलधारा और श्री मनकामेश्वर गजानन महाराज की साक्षी में हो रहा है कार्यक्रम, पितृ ऋण से उऋण होने का मिल रहा है अवसर

जोधपुर श्री श्रीविद्या अनुष्ठान केन्द्र, श्रीमाली ब्राह्मण श्री मनकरण जी की नाड़ी (मिनका-नाड़ी), चाँदपोल, जोधपुर में पितृ तर्पण कार्यक्रम चल रहा है। यह कार्यक्रम सर्वपितृ अमावस्या 21 सितम्बर तक जारी रहेगा।

मिनका-नाड़ी पर हो रहे इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए प्रवक्ता भानु कुमार दवे ने बताया कि चाँदपोल के बाहर सुरम्य पहाडियों में स्थित अति-प्राचीन परम् सिद्ध स्थान मिनका-नाड़ी की चमत्कारिक तपोभूमि पर स्थित पवित्र सरोवर में महालय श्राद्ध पक्ष के अति पावन अवसर पर बहुजन-हिताय व बहुजन-सुखाय की भावना रखते हुए ज्योतिषाचार्य पण्ड़ित पूर्णेंदु व्यास द्वारा प्रतिदिन प्रातः 06.30 बजे पितृ-तर्पण करवाया जा रहा हैं।

प्रवक्ता भानु कुमार दवे ने बताया कि पवित्र शम्भू-सागर की पावन जलधारा से और श्री मनकामेश्वर गजानन महाराज की दिव्य साक्षी में होने वाले तर्पण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जातक अपने पूर्वजों को तर्पण अर्पण कर उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर पितृ ऋण से उऋण हो रहे हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि अनेका-अनेक यत्न करने पर भी पितृगण संतुष्ट व तृप्त नहीं होते हैं जब तक कि उनको तर्पण द्वारा अर्थात् उन्हें जलांजलि द्वारा संतुष्ट व तृप्त ना किया जाए। पितृ-तर्पण ही पितरो को तृप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम हैं। तर्पण का यह कार्यक्रम 21 सितम्बर सर्व-पितृ अमावस्या तक प्रतिदिन नियमित रूप से जारी रहेगा। पितृ-तर्पण का यह कार्यक्रम न केवल पितरों को संतुष्ट व तृप्त करने का माध्यम हैं बल्कि पितरों के दिव्य आशीर्वाद से अपनी दशा और दिशा सुधारने का सुअवसर हैं। मिनका-नाड़ी की यह तपोभूमि जोधपुर के श्रद्धालुओं के लिए निरंतर आस्था और विश्वास का केंद्र बनती जा रही हैं।
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जालोरी गेट से निकली शोभायात्रा, गुलाब सागर सहित अन्य जल सरोवरों में इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का विसर्जन, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

महिलाओं ने अनंत चतुर्दशी पर व्रत रखा, बच्चों के लिए आयोजित की गई फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता

जोधपुर/राजस्थानजोधपुर के विभिन्न क्षेत्रों में मनाए गए दस दिवसीय गणपति महोत्सव का समापन शनिवार को भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। अनंत चतुर्दशी के दिन, सुबह से ही शहर में "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारों के साथ ढोल की थाप सुनाई देने लगी। लोग खुशी से लबरेज थे और बप्पा को विदाई देने के लिए अलग-अलग अंदाज में जलाशयों की ओर बढ़ने लगे।

बड़ी संख्या में लोग ट्रैक्टर ट्रॉली, लोडिंग टैक्सियों और खुली जीपों पर सजाकर अपनी-अपनी गणेश प्रतिमाओं के साथ डीजे की धुनों पर थिरकते नजर आए। सभी ने बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना की और विसर्जन के वक्त उत्साह से भरे वातावरण में भजन गाए। विसर्जन के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहरभर में पुलिस को अलर्ट रखा गया था। प्रशिक्षित गोताखोरों को जलाशयों के किनारे तैनात किया गया ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

जालोरी गेट से शुरू हुई शोभा यात्रा शहर के भीतरी क्षेत्र से गुजरी और गुलाब सागर की ओर बढ़ी। इस बार के विसर्जन में इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का विशेष ध्यान रखा गया, जो राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार थी। तमाम स्थानीय गणेश महोत्सव समितियों द्वारा स्थापित प्रतिमाओं का जोरदार स्वागत करने के लिए शिवसेना के कार्यकर्ता भी मौजूद थे।

अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर महिलाओं ने सौभाग्य की रक्षा और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखा। इस मौके पर भक्तों ने अनन्त भगवान का पूजन किया और उपवास भी रखा।

इसके अलावा, गणेश महोत्सव की पूर्व संध्या पर चांदपोल क्षेत्र में माता कुंड पर भक्तों ने भव्य धार्मिक आयोजन किया था। इस दौरान भगवान गणेश को छप्पन भोग अर्पित किया गया। बच्चों के लिए विशेष फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छोटे-छोटे बच्चे राधा रानी, शिव-पार्वती, राम-सीता, फौजी, पुष्पराज, अध्यापक, किसान और अन्य पात्रों का रूप धरकर आए। सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर उनकी सराहना की गई।

गणपति महोत्सव का यह समापन शहर के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में एक विशेष स्थान रखता है और सभी ने इसे एक यादगार अनुभव के रूप में मनाया।

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जोधपुर में ब्रह्मपुरी पीपलीया चौक पर चल रहे दस दिवसीय गणेश महोत्सव में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन

नितिन बोहरा के नेतृत्व में विशेष श्रृंगार और महाआरती का आयोजन, भक्तों ने किया श्रद्धा से पूजन

जोधपुर। विसर्जन की पूर्व संध्या पर भगवान गणेश को 56 भोग अर्पित किए गए। यह आयोजन शहर के भीतरी क्षेत्र ब्रह्मपुरी पीपलीया चौक स्थित भाटिया बास मोहल्ले में चल रहे दस दिवसीय गणेश महोत्सव के तहत किया गया। इस अवसर पर भक्तों में गहरी श्रद्धा और उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम का संचालन नितिन बोहरा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें अन्नकूट महोत्सव के तहत 56 भोग एवं विशेष श्रृंगार की झांकी सजाई गई। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान गणेश का पंचामृत अभिषेक किया गया और उनके 1001 नामों के साथ दूर्वा अर्पित की गई।

भक्तों ने शहनाई और शंख की धुनों के बीच 108 ज्योत की महाआरती का आयोजन किया, जिससे वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया। राहुल ओझा ने बताया कि भगवान गणेश के सभी सदस्यों द्वारा 56 प्रकार के विभिन्न व्यंजन तैयार करवाए गए, जो इस विशेष अवसर पर अर्पित किए गए।

इस भव्य आयोजन में जया बोहरा, कविता ओझा, कुशाग्र बोहरा, किशोर-सीमा दवे, हर्ष, तुषार, सौरभ, रेखा सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर भगवान गणेश की आराधना की और इस पर्व को यादगार बनाया।
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संजय पंचारिया एण्ड पार्टी द्वारा भजनों की प्रस्तुति, गणेश उत्सव स्थल पर जीवंत झांकियों का प्रदर्शन

गणेश महोत्सव समिति ने सायं आरती के बाद भजन संध्या का रखा है आयोजन, सैन्य इतिहास की प्रमुख घटनाओं के पोस्टर भी होंगे प्रदर्शित

जोधपुर। गोल बिल्डिंग चौराहे पर स्थित भगवान श्री गणेश के उत्सव स्थल पर बुधवार को "एक शाम गणेश के नाम" भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायक संजय पंचारिया एण्ड पार्टी भजनों की प्रस्तुति देंगे।

गणेश महोत्सव समिति के प्रवक्ता अरूण माथुर ने जानकारी दी कि इस भजन संध्या का आयोजन सायं आरती के बाद होगा, जिसमें संजय पंचारिया एण्ड पार्टी एक से बढ़कर एक भजनों का आनंद श्रद्धालुओं को देंगे।

उत्सव स्थल को सजाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर और संघ के 100 वर्ष की जीवंत झांकियां तैयार की गई हैं। इस प्रदर्शन का उद्देश्य भक्तों में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाना है।

माथुर ने बताया कि श्री गणेश उत्सव स्थल पर भारत के सैन्य इतिहास की प्रमुख घटनाओं को दर्शाते हुए पोस्टर भी लगाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
 
• प्रथम भारत युद्ध (1947)
• द्वितीय भारत-पाक युद्ध (1965)
• बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (1971)
• कारगिल युद्ध (1999)
• उरी हमला (2016)
• पुलवामा (2019)
• हाल ही में किया गया ऑपरेशन सिंदूर (2025)

इस अवसर पर ऑपरेशन सिंदूर की विंग कमाण्डर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी के अलावा सेना के जवानों की जीवन झांकी भी पेश की जाएगी। इसके साथ ही आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर संघ के बाल स्वयंसेवकों द्वारा जीवंत झांकी प्रस्तुत की जाएगी।

यह कार्यक्रम न केवल धार्मिकता को बढ़ावा देगा, बल्कि देश भक्ति की भावना को भी जागृत करेगा। सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे इस भजन संध्या में भाग लें और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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सप्त ऋषियों और पूर्वजों के प्रति आस्था, पवित्र जलाशयों पर तर्पण कर समर्पित किया व्रत का पुण्य फल, नीम और पीपल सहित पांच वृक्षों का किया पूजन

मणीचे के आटा का हलवा, राब-खीर लगता है भोग, तुरई-काचरे की सब्जी और केर-सांगरी का रायता पितरों को अर्पित, समाज की बुजुर्ग महिलाओं से सुनी कथा

जोधपुर भाद्रपद शुक्ला पंचमी को ऋषि पंचमी के दिन जोधपुर में श्रीमाली ब्राह्मण समाज की महिलाओं की ओर से सप्त ऋषियों एवं पूर्वजों के प्रति आस्था व्यक्त करने के लिए तर्पण करने की अनूठी परम्परा सदियों से चली आ रही है। व्रती महिलाएं सप्त ऋषियों एवं ऋषि पत्नियों के नाम सगोत्र शास्त्रोक्त विधि से तर्पण कर मोक्ष की कामना करती है। इतना ही नहीं पवित्र जलाशयों पर ससुराल व पीहर पक्ष की तीन-तीन पीढिय़ों तक के दिवंगत ज्ञात अज्ञात पूर्वजों को याद कर तर्पण करती है। साथ ही अपने एक दिन के व्रत का पुण्य फल भी पूर्वजों को मोक्ष और सद्गति के लिए समर्पित करती है।

तर्पण के बाद नीम, आक, पीपल, बोल्टी एवं हाटी-काटी वृक्ष का पूजन कर समाज की बुजुर्ग महिलाओं से ऋषि पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का श्रवण करती है। कथा श्रवण के बाद व्रती महिलाएं अपने घरों में मणीचा (बिना बोया धान) की खीर, बनाकर ऋषियों, ऋषि पत्नियों व अपने और पीहर के सात पीढिय़ों के पूर्वजों को तुरई-काचरे की सब्जी, केर-सांगरी का रायता पितरों को अर्पित कर व्रत का पारणा करती है।

पं. रमेशचंद्र बोहरा के अनुसार इस व्रत को करने वाली व्रती महिलाएं वनक्षेत्र में पैदा होने वाले मणीचे के आटा का भोग ठाकुरजी, सप्त ऋषियों व ऋषि पत्नियों को लगाकर प्रसाद ग्रहण करते थे। मणीचे का आटा फलाहार की श्रेणी में आता है, उस मणीचे को शुद्ध व साफ कर काम में लेते थे। उस मणीचे के आटे का हलवा, खीर व राब बनाकर तथा साथ में तुरई की सब्जी का सेवन किए जाने की परम्परा है।

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2100 किलो फूलों से सजे मंदिर में 7-8 हजार भक्तों ने किए दर्शन; पदनाभम और मीनाक्षी अम्मा मंदिरों की अद्भुत प्रतिकृति ने मोहा मन

बंगाली कारीगरों व कार्यकर्ताओं ने 10 दिन में दिया दक्षिण भारतीय स्वरूप, बारिश के बावजूद उत्कृष्ट प्रबंधन; वॉलेट पार्किंग व विशेष व्यवस्था से भक्तों को मिली सुविधा

जोधपुरश्री मनोकामेश्वर नाथ डुंगरिया महादेव मंदिर प्रांगण में इस वर्ष का पाटोत्सव बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर, भक्तों को दक्षिण भारत के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के अलौकिक दर्शन करने का अवसर मिला, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

डुंगरिया महादेव मंदिर में भव्य पाटोत्सव: दक्षिण भारत की अद्भुत झांकी

जोधपुर शहर के हृदय में स्थित श्री मनोकामेश्वर नाथ डुंगरिया महादेव मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पाटोत्सव का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस वर्ष का पाटोत्सव भक्तों के लिए एक विशेष अनुभव लेकर आया, जब मंदिर परिसर को दक्षिण भारत के भव्य और ऐश्वर्यशाली मंदिरों का रूप दिया गया।

ट्रस्ट के अध्यक्ष सोहन भूतड़ा ने बताया कि पिछले 10 दिनों से कोलकाता के बंगाली कारीगर और डुंगरिया मंदिर के समस्त कार्यकर्ता लगातार इस कार्य में जुटे हुए थे, ताकि मंदिर को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तीर्थों का हूबहू स्वरूप दिया जा सके।

पदनाभम और मीनाक्षी अम्मा मंदिरों की जीवंत प्रतिकृति

इस पाटोत्सव में विशेष रूप से केरल के विश्व में ऐश्वर्यशाली व धनवान मंदिरों में गिने जाने वाले श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और तमिलनाडु के मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर की भव्य प्रति कृतियां स्थापित की गईं। इन प्रतिकृतियों को इतनी सजीवता से बनाया गया था कि उपस्थित भक्तों को वास्तव में यह आभास हुआ कि वे दक्षिण भारत के इन भव्य मंदिरों के ही दर्शन कर रहे हैं। कारीगरी इतनी अद्भुत और अद्वितीय थी कि लोग इसे देखकर अचंभित हो उठे। मंदिर के स्तंभों और पत्थरों पर वैसी ही बारीकी से कारीगरी की गई थी, जैसी इन भव्य मंदिरों में होती है।

शेषनाग पर विराजे भगवान और महालक्ष्मी के दर्शन
पाटोत्सव के दौरान भगवान शिव स्वयं शेषनाग के ऊपर विराजित थे और साथ में महालक्ष्मी के भव्य दर्शन भी भक्तों को कराए गए। मंदिर में सात दरवाजे बनाए गए थे, जहां भक्तों ने अपनी मनोकामनाएं मांगी। पूरे मंदिर प्रांगण में प्राकृतिक फूलों की मनमोहक महक फैली हुई थी, जिसमें लगभग 2100 किलो पुष्प मंदिर की सजावट में काम आए।

बारिश के बावजूद भक्तों की अपार भीड़ और उत्कृष्ट व्यवस्था

इस दौरान भगवान इंद्रदेव भी बड़े मेहरबान रहे और मौसम बड़ा ही आनंदित हो गया। हालांकि बारिश की विपरीत परिस्थितियों में भी डुंगरिया परिवार द्वारा व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संभाली गईं। भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी, जिसे व्यवस्थित करने के लिए कतारबद्ध दर्शनों हेतु बैरिकेड लगाए गए, जिससे सुलभ दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी।

कोषाध्यक्ष हंसराज धूत ने बताया कि इस वर्ष वॉलेट पार्किंग की व्यवस्था से सभी को सुविधा मिली और यातायात बाधित नहीं हुआ। ट्रस्ट द्वारा लगभग एक हजार चार पहिया वाहन और एक हजार दुपहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की गई थी। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मंदिर आने-जाने की विशेष व्यवस्था भी की गई थी।

भव्य आरती और महाप्रसादी

सायं 6:15 बजे संत रामप्रसाद बड़ा राम, सूरसागर के सानिध्य में भक्तों द्वारा भगवान की भव्य आरती की गई। प्रसादी की व्यवस्था में भी डुंगरिया मंदिर के समस्त कार्यकर्ता जुटे रहे। अनुमानतः 7000 से 8000 लोगों ने महाप्रसादी ग्रहण की।

आधुनिक सुविधाओं के साथ परंपरा का संगम

मंदिर में प्रवेश से पहले दर्पण की विशेष व्यवस्था थी, जिसमें आने वाले भक्तों ने अपने प्रतिबिंब को देखकर प्रसंचित मुद्रा में मंदिर में प्रवेश किया। परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाते हुए, मंदिर प्रांगण में मोबाइल कैमरे से फोटो लेना प्रतिबंधित रहा, वहीं स्कैनर के साथ सेल्फी जोन की व्यवस्था मंदिर के बाहर की गई थी, जहां युवक-युवतियों ने अपनी तस्वीरें लीं।