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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खराब लिखावट को बताया मरीजों की जान से खिलवाड़, डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन की व्यवस्था लागू होने तक सख्ती से पालन करने के निर्देश, मेडिकल कॉलेजों में शुरू होगी हैंडराइटिंग की ट्रेनिंग

अपठनीय लिखावट चिंताजनक, बन सकता है जीवन और मृत्यु का प्रश्न, कोर्ट ने कहा, स्पष्ट लिखावट मरीजों का मौलिक अधिकार, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा मामला

जोधपुर/चंडीगढ़डॉक्टरों की लिखावट को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को साफ और बड़े अक्षरों में प्रिस्क्रिप्शन लिखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यह मरीजों का मौलिक अधिकार है और इससे खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने कहा कि अक्सर डॉक्टरों की लिखावट इतनी खराब होती है कि मरीज या उनके परिजन समझ ही नहीं पाते कि कौन सी दवा लिखी गई है। कभी-कभी दवा बेचने वाले के गलत पढ़ने से भी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी डॉक्टर अब बड़े अक्षरों (CAPITAL LETTERS) में स्पष्ट लिखकर ही दवाइयां लिखें। जब तक डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन की व्यवस्था लागू नहीं होती, यह नियम सख्ती से अपनाया जाए। मेडिकल कॉलेजों में दो साल के भीतर हैंडराइटिंग की ट्रेनिंग शुरू की जाए।

आपको बता दें कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट एक मामले में बलात्कार, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हालांकि मूल मामला अलग था, लेकिन अदालत ने इस दौरान पर्चियों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति पुरी ने कहा, “सरकार और संस्थानों के पास इतनी तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद अगर आज भी डॉक्टर अपठनीय लिखावट में दवाएं लिख रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है। यह सीधे-सीधे जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन सकता है।”

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को मरीजों के लिए साफ और पठनीय प्रिस्क्रिप्शन लिखने का आदेश दिया है, जिसमें कहा गया है कि यह मरीजों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि पर्चे बड़े अक्षरों में लिखे जाएं या टाइप किए हुए हों, और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को भी निर्देश दिया है कि वह मेडिकल शिक्षा में स्पष्ट लिखावट पर ध्यान केंद्रित करे।

मुख्य बिंदु:

साफ लिखावट अनिवार्य: कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि सभी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन और डायग्नोस्टिक नोट्स स्पष्ट होने चाहिए, चाहे वे किसी भी अस्पताल या निजी क्लिनिक से हों।

मरीजों का मौलिक अधिकार: कोर्ट ने पढ़ने योग्य प्रिस्क्रिप्शन को मरीजों के मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा है।

बड़े अक्षरों में लिखने का सुझाव: कोर्ट ने बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में लिखने या फिर टाइप करके या डिजिटल रूप में पर्चे देने का सुझाव दिया है।

मेडिकल शिक्षा में शामिल होगा नियम: भविष्य में मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के पाठ्यक्रम में भी स्पष्ट लिखावट के नियम को शामिल किया जाएगा।

क्यों है यह आदेश महत्वपूर्ण:

डॉक्टरों की खराब लिखावट के कारण अक्सर, मरीजों को गलत दवाएं मिल सकती हैं, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है। इसलिए, यह आदेश मरीजों के हितों और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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302 नर्सिंगकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर जताया विरोध, गांधीवादी तरीके से शुरू हुआ आंदोलन

राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने की स्थाई भर्ती की मांग, पेरामेडिकल संगठन भी शामिल

जोधपुर राजस्थान में नर्सिंग अधिकारियों ने निविदा भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ अपना पहला चरण शुरू कर दिया है। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन जोधपुर के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह मेड़तिया के नेतृत्व में 302 निविदा नर्सिंग कर्मियों की भर्ती के विरोध में आज से काली पट्टी बांधकर काम करने का निर्णय लिया गया है। यह आंदोलन गांधीवादी तरीके से किया जा रहा है।
संघर्ष समिति के संयोजक सुरेन्द्र चौधरी के निर्देश पर, विभिन्न चिकित्सालयों में नर्सिंग कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। महात्मा गांधी अस्पताल में राजू सिंह, मथुरादास माथुर अस्पताल में श्रीगोपाल व्यास, उम्मेद अस्पताल में गजेन्द्र शेखावत, और कमला नेहरू अस्पताल में जीतेन्द्र बड़वाल के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा है। अगले चार-पांच दिन तक इसी तरह काली पट्टी बांधकर विरोध जारी रहेगा।

सह संयोजक जगदीश जाट ने बताया कि निविदा भर्ती प्रक्रिया में न तो पारदर्शी चयन है, न कोई नियम और न ही कोई ऑनलाइन प्रक्रिया। हजारों लोगों ने फॉर्म भरे हैं, लेकिन किसी को रसीद या नंबर नहीं दिया गया। चर्चा है कि विभिन्न फर्मों द्वारा बैक डोर एंट्री और लेन-देन के माध्यम से भर्ती की जा रही है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को मिलने की संभावना कम हो रही है।
उप संयोजक बसंत रॉयल ने कहा कि निविदा भर्ती के माध्यम से धीरे-धीरे स्थाई पदों को खत्म किया जा रहा है और निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। पेरामेडिकल संगठन ने भी इस आंदोलन में भाग लेकर सरकार से मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर स्थाई भर्ती की जाए।

राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन जोधपुर शहर के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह मेड़तिया ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
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डॉ. राकेश विश्रोई की आत्महत्या और डॉ. रवि शर्मा की मौत के बाद रेजिडेंट्स में आक्रोश, कार्य बहिष्कार का ऐलान

चार प्रमुख मांगों के साथ प्रशासन पर बढ़ाया दबाव

जोधपुर एस. एन. मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर्स ने प्रशासन की कथित लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। यह निर्णय डॉ. राकेश विश्रोई (तृतीय वर्ष रेजिडेंट, फार्माकोलॉजी विभाग) की आत्महत्या और उदयपुर में डॉ. रवि शर्मा की मृत्यु के बाद लिया गया है।  डॉ. विश्रोई ने आत्महत्या से पहले छोड़े गए वीडियो संदेश में मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक दबाव का जिक्र किया था।

15 जून 2025 को RDA जोधपुर ने पत्र क्रमांक RDA / SNMC / 14 के माध्यम से प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी थीं:

1. संबंधित व्यक्ति को तत्काल पद से हटाया जाए।
2. एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
3. कॉलेज प्रशासन द्वारा एक आंतरिक जांच समिति गठित की जाए, जिसकी प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट साझा की जाए।
4. रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य-सुरक्षा और कार्य वातावरण में सुधार किया जाए।

18 जून को प्रशासन और RDA के बीच हुई बातचीत में प्रशासन ने कार्यवाही का आश्वासन दिया था, जिसके बाद कार्य बहिष्कार का निर्णय स्थगित कर दिया गया था। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर रेजिडेंट्स में  आक्रोश बढ़ गया है। उदयपुर में डॉ. रवि शर्मा की मृत्यु ने इस आक्रोश को और तेज कर दिया है। इस घटना में भी प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लग रहे हैं और URDA के पत्र क्रमांक 9 में दी गई सभी मांगों का समर्थन किया जा रहा है।

KDA जोधपुर द्वारा 19 जून 2025 को आयोजित GBM में सर्वसम्मति से 19 जून 2025 को शाम 8:00 बजे से संपूर्ण कार्य बहिष्कार (Emergency, EOT, ICU, लेबर रूम को छोड़कर) करने का निर्णय लिया गया है। यदि इसके बाद भी प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठाता है तो सभी रेजिडेंट्स पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे, जिसमें आपातकालीन सेवाएँ भी शामिल होंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।

रेजिडेंट डॉक्टर्स ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जयपुर, अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा विभाग, जयपुर,  निदेशक, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जयपुर, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जयपुर, प्राचार्य एवं नियंत्रक एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर, संभागीय आयुक्त, जोधपुर संभाग, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग, जोधपुर, जिला कलेक्टर, जोधपुर और समस्त विभागाध्यक्ष, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर को भी इस बारे में सूचित किया है।

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ईमेल से मिली धमकी के बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने किया तलाशी अभियान, 3:30 बजे तक बरती जा रही है सतर्कता 

कलेक्ट्रेट परिसर में नहीं मिला बम, लेकिन प्रशासन अलर्ट

जोधपुरशहर में आज दिन भर दहशत का माहौल रहा। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। धमकी में आज दोपहर 3:30 बजे कलेक्ट्रेट को निशाना बनाने की बात कही गई थी। इस सूचना के मिलते ही पुलिस प्रशासन और गुप्तचर एजेंसियां अलर्ट हो गईं।

जिला कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।  बम निरोधक दस्ते ने पूरे परिसर की गहनता से तलाशी ली।  डॉग स्क्वायड की मदद से भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रकार का संदिग्ध पदार्थ या बम बरामद नहीं हुआ है।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर जवाहर चौधरी ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि सीआईडी को ईमेल के ज़रिए मिली सूचना के बाद तुरंत ही जिला प्रशासन, पुलिस और गुप्तचर विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की कड़ी सुरक्षा के साथ जांच की गई है और अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है।  हालांकि, 3:30 बजे तक सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि यह धमकी अन्य जिलों में मिली धमकियों की तरह एक और "गीदड़ भभकी" साबित हो सकती है।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर जवाहर चौधरी ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी और आश्वासन दिया कि सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जांच जारी है।

जवाहर चौधरी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, जोधपुर
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जोधपुर के मिलिट्री अस्पताल और रेलवे अस्पताल ने किया आपसी सहयोग का करार, युद्ध और आपदा में मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा

समन्वित चिकित्सा सेवाओं से मरीजों को मिलेगा फायदा

जोधपुरयुद्ध और संकट की स्थिति में चिकित्सा सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जोधपुर के मिलिट्री अस्पताल और उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेलवे अस्पताल ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू के माध्यम से दोनों अस्पताल आपसी सहयोग से काम करेंगे और आपातकालीन स्थितियों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

जोधपुर के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य युद्ध और संकट के समय विशेष परिस्थितियों में दोनों अस्पतालों द्वारा संयुक्त रूप से कार्य करना है। इससे चिकित्सा सेवाओं का समन्वय बेहतर होगा और प्रभावशीलता बढ़ेगी। उन्होंने इस एमओयू को दूरगामी और सकारात्मक परिणामों वाला बताया।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस. आर. बुनकर ने जानकारी देते हुए बताया कि मिलिट्री अस्पताल, जोधपुर की ब्रिगेडियर शर्मिला सिन्हा के नेतृत्व में यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।  इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी (प्रशासन) डॉ. नेहा तिवारी भी उपस्थित रहीं। इस समझौते से युद्ध और संकट के दौरान  मरीजों को त्वरित और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। दोनों अस्पतालों के संसाधनों और विशेषज्ञता को एकीकृत करके, चिकित्सा प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

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स्व. श्री सत्यदेव पुरोहित की स्मृति में और संत खेतेश्वर जयंती के उपलक्ष में CHB-15 सेक्टर विकास समिति और जोधपुर ब्लड डोनर्स ने आयोजित किया रक्तदान शिविर, घांची नवयुवक मंडल और राजपुरोहित मेडिकल मित्र मंडल ने भी आयोजित किए रक्तदान शिविर

सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी और कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने रक्तदान शिविरों में लिया भाग 

जोधपुरकई रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 15 सेक्टर विकास समिति और जोधपुर ब्लड डोनर्स के संयुक्त तत्वाधान में स्वर्गीय श्री सत्यदेव पुरोहित पुत्र मानमल पुरोहित की पुष्पांजलि व रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। 15 सेक्टर विकास समिति के अध्यक्ष कमल किशोर जसमतिया ने बताया कि रक्तदान शिविर में युवा महिला और बढ़ चढ़कर रक्तदान किया। जिसमें कार्यक्रम में 50 से अधिक रक्तदान परिवार जन एवं युवा, महिला, मोहल्ले वासी एवं विकास समिति पदाधिकारी ने मिलकर रक्तदान किया। इस मौके पर सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी, पूर्व जिला महामंत्री महेंद्र मेघवाल, स्थानीय पार्षद विक्रम सिंह पवार, सत्यनारायण पुरोहित, सत्यजीत पुरोहित, अंकित पुरोहित आशीष पुरोहित, परिवारजन और और विकास समिति के राज कुमार माथुर पृथ्वी सिंह एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

घांची नवयुवक मण्डल द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में 218 यूनिट रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। घांची नवयुवक मण्डल संरक्षक गौरीशंकर बोराणा ने बताया की नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित घांची नवयुवक मण्डल के मार्गदर्शक स्व अमृतलाल जी बोराणा एवं पूर्व अध्यक्ष स्व गोपीकिशन जी सोलंकी को रक्तांजलि अर्पित करने हेतु  रविवार सुबह 8 बजे से रक्तदान शिविर घांची न्याति नोहरा थियेटर में आयोजित किया गया। जिसमें 218 रक्तदाओं ने रक्तदान कर रक्तांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में सूरसागर विधायक देवेंद्र जी जोशी, उप महापौर किशन जी लड्डा,नेता प्रतिपक्ष लक्ष्मीनारायण सोलंकी, अध्यक्ष घांची महासभा जोधपुर राजेंद्र सोलंकी , महेंद्र जी मेघवाल, ,पूर्व राज्यमंत्री रमेश जी बोराणा, राजेंद्र जी बोराणा, पार्षद संगीता सोलंकी,पार्षद अशोक भाटी,पार्षद सुरेश जो जोशी,पूर्व अध्यक्ष घांची महासभा राधेश्याम  बोराणा, जुगल किशोर भाटी, अध्यक्ष घांची नवयुवक मण्डल पंकज भाटी, वरुण धाणादिया, वरिष्ठ जन सेवा समिति अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण भाटी,महिला मण्डल अध्यक्ष गीता जी भाटी, मण्डल अध्यक्ष अरविंद जी पुरोहित, अधिवक्ता महेंद्र जी छंगाणी नारायण सिंह जी बोराणा, अचलुराम जी रहे उपस्थित।

संत श्री खेतेश्वर जयंती महोत्सव के उपलक्ष में रविवार को विशाल रक्तदान शिविर में 305 रक्तवीरो ने किया रक्तदान। राज  पुरोहित मेडिकल मित्र मंडल और टीम समर्पण के तत्वाधान में रक्तदान शिविर संम्पन हुआ। राजपुरोहित मेडिकल मित्र मंडल के जितेंद्रसिंह भैंसेर कोट ने बताया की रक्तदान शिविर का आयोजन श्री श्री रविशंकर ब्लड डोनेशन सेंटर पर रखा गया, जिसमें विशिष्ठ अतिथि क़ानून मंत्री राजस्थान सरकार जोगाराम पटेल उपस्थित हुए, और रक्तवीरों का हौसला अफजाई किया।

इस मौके पर विधायक सुरसागर देवेंद्र जोशी, अतिरिक्त ज़िला कलेक्टर सुरेंद्रसिंह पुनायता, में. जनरल नरपतसिंह पुनायता, डॉ. निर्मल गहलोत, एमडीएम अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित, डॉ. दलपत सिंह समदडी, समाज सेवी हनुमान सिंह खाराबेरा, पूर्व उप पुलिस अधीक्षक ख़ुशाल सिंह लुणावास, महेंद्र सिंह तिंवरी, राजेंद्र सिंह लुणावास, डॉ. अनु राजपुरोहित, महेंद्र सिंह खिंचन, राहुल सिंह झाबरा, अभयसिंह खेड़ापा, श्रवण सिंह प्रधान, अतिरिक्त महाधिवक्ता नरेंद्रसिंह, डॉ. दिनेशदत और सीमा शर्मा, सोहन सिंह उस्ताद बड़ली,करण सिंह भैंसेर, डॉ. सोहन सिंह घेवड़ा नारायण सिंह पाल,सुरेंद्र सिंह खेड़ापा, श्याम सिंह चाड़वास, जयंती अध्यक्ष रहे उपस्थित।
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35 वर्षों की सेवा के बाद भावुक विदाई, पूर्व सहयोगियों ने की प्रशंसा

सेवानिवृत्ति समारोह में पूर्व अधीक्षकों ने किया सम्मान

जोधपुर शहर के प्रमुख अस्पताल महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) के वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी प्रशांत दवे 35 वर्षों की सेवा के बाद सोमवार, 31 मार्च, 2025 को सेवानिवृत्त हो गए।  इस अवसर पर आयोजित एक भावुक विदाई समारोह में उनके लंबे और समर्पित सेवाकाल की सराहना की गई।

दवे, जिन्हें उनके सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है, एमजीएच के अस्पताल वस्त्रागार के प्रभारी भी थे। उनकी सेवानिवृत्ति पर आयोजित समारोह में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित हुए। डॉ. पी.सी. व्यास (पूर्व अधीक्षक, एमजीएच) ने अपने संबोधन में दवे द्वारा अस्पताल के लिए किए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने दवे के कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की सराहना की।

नरपतसिंह कच्छवाहा (पूर्व नर्सिंग अधीक्षक एमजीएच, प्रभारी भारत सेवा संस्थान) ने भी दवे के कार्य के प्रति समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री दवे ने अपने कार्यकाल में हमेशा पूरी लगन और ईमानदारी से काम किया। सारा जेराल्ड (पूर्व नर्सिंग अधीक्षक, एमजीएच) ने बताया कि दवे अपनी आठ घंटे की ड्यूटी के अलावा भी अस्पताल की सेवा में तत्पर रहते थे और  जरूरत पड़ने पर 24 घंटे उपलब्ध रहते थे।

इस समारोह में डॉ. पी.सी. व्यास, नरपतसिंह कच्छवाहा, सारा जेराल्ड, महेन्द्र कुमार बोहरा (पूर्व जिलाध्यक्ष आरएनए एवं प्रभारी सीसीयू एमजीएच), चन्द्रकान्ता दवे, सुधा, सुषमा, सुरेन्द्र दवे, रामकुमार दवे, ओंकारचंद त्रिवेदी, सुरेश दवे, सुरेश शर्मा, प्रेमसिंह, त्रिभुवन बोहरा, विक्रान्त दवे, भूमिका दवे, दिव्यांशी दवे, विमलेश घोष सहित एमजीएच के पूर्व नर्सिंग अधीक्षकों और अस्पताल कर्मचारियों ने भाग लिया। समारोह के अंत में महिपाल सिंह ने आयोजन समिति की ओर से आभार व्यक्त किया, जबकि अरविंद अपूर्वा ने मंच का सफल संचालन किया।