दीपावली और गोवर्धन पूजन के अवसर पर अग्रसेन वाटिका में हजारों अग्रवाल समाजजन हुए शामिल, योगी प्रेम स्वामी महाराज के प्रवचन, न्यायाधीश मनोज गर्ग ने की शिरकत
समिति ने उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया सम्मानित, अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण कर मनाई खुशियां
जोधपुर। दीपावली के उल्लास और गोवर्धन पूजन के अवसर पर, अग्रबंधु सेवा समिति जोधपुर द्वारा अग्रसेन वाटिका, पांचवी रोड पर एक भव्य दीपावली स्नेह मिलन एवं अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समिति के अध्यक्ष जे.पी. गर्ग ने बताया कि कार्यक्रम में श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के योगी प्रेम स्वामी महाराज के नेतृत्व में ठाकुर जी के कीर्तन एवं सत्संग का विशेष आयोजन भी किया गया। उन्होंने आगे बताया कि आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के माननीय न्यायाधीश मनोज गर्ग थे।
कार्यक्रम की शुरुआत योगी प्रेम स्वामी महाराज और मुख्य अतिथि माननीय न्यायाधीश मनोज गर्ग के स्वागत सत्कार से हुई। संस्था के संयोजक रोशन लाल गर्ग, अध्यक्ष जे.पी. गर्ग, सचिव किशन बंसल, कोषाध्यक्ष ललित अग्रवाल, उपाध्यक्ष दिलीप बंसल, सह-सचिव हरि अग्रवाल तथा कार्य कारिणी सदस्यों विजय अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, भोला राम अग्रवाल ने साफा और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
योगी प्रेम स्वामी महाराज ने अपने सत्संग और भजनों के माध्यम से दीपावली के पर्व, गोवर्धन पूजन और अन्नकूट के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत, गणेश जी, अग्रसेन जी महाराज, महालक्ष्मी जी और ठाकुर जी की आरती की गई और विशाल अन्नकूट का भोग लगाया गया। हजारों की संख्या में अग्रवाल समाज के लोगों ने भक्तिमय वातावरण में अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण कर खुशियां मनाईं।
इस अवसर पर अग्रवाल समाज के गणमान्य नागरिकों, समिति के संरक्षक सदस्य रामजी लाल लीला, सत्यनारायण अग्रवाल, दुलीचंद अग्रवाल, संस्थान के अध्यक्ष उमेश लीला, सचिव अनिल सिंगल, पंचायत के कोषाध्यक्ष मुकेश सिंगल एवं समाज की अन्य संस्थाओं के पदाधिकारियों को भी दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।
समिति की ओर से पिछले कार्यक्रम, 'विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन' में सराहनीय कार्य करने वाले समाज के महिला-पुरुषों- चंदा मित्तल, रीनी अग्रवाल, नलिनी बंसल, राखी गुप्ता, मंदीप गर्ग, विनोद बंसल एवं विजय मुरारका को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह आयोजन अग्रबंधुओं के बीच स्नेह और एकता का प्रतीक बना, जहाँ सभी ने मिलकर पर्वों की खुशियां मनाईं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

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