2100 किलो फूलों से सजे मंदिर में 7-8 हजार भक्तों ने किए दर्शन; पदनाभम और मीनाक्षी अम्मा मंदिरों की अद्भुत प्रतिकृति ने मोहा मन

बंगाली कारीगरों व कार्यकर्ताओं ने 10 दिन में दिया दक्षिण भारतीय स्वरूप, बारिश के बावजूद उत्कृष्ट प्रबंधन; वॉलेट पार्किंग व विशेष व्यवस्था से भक्तों को मिली सुविधा

जोधपुरश्री मनोकामेश्वर नाथ डुंगरिया महादेव मंदिर प्रांगण में इस वर्ष का पाटोत्सव बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर, भक्तों को दक्षिण भारत के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के अलौकिक दर्शन करने का अवसर मिला, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

डुंगरिया महादेव मंदिर में भव्य पाटोत्सव: दक्षिण भारत की अद्भुत झांकी

जोधपुर शहर के हृदय में स्थित श्री मनोकामेश्वर नाथ डुंगरिया महादेव मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पाटोत्सव का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस वर्ष का पाटोत्सव भक्तों के लिए एक विशेष अनुभव लेकर आया, जब मंदिर परिसर को दक्षिण भारत के भव्य और ऐश्वर्यशाली मंदिरों का रूप दिया गया।

ट्रस्ट के अध्यक्ष सोहन भूतड़ा ने बताया कि पिछले 10 दिनों से कोलकाता के बंगाली कारीगर और डुंगरिया मंदिर के समस्त कार्यकर्ता लगातार इस कार्य में जुटे हुए थे, ताकि मंदिर को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तीर्थों का हूबहू स्वरूप दिया जा सके।

पदनाभम और मीनाक्षी अम्मा मंदिरों की जीवंत प्रतिकृति

इस पाटोत्सव में विशेष रूप से केरल के विश्व में ऐश्वर्यशाली व धनवान मंदिरों में गिने जाने वाले श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और तमिलनाडु के मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर की भव्य प्रति कृतियां स्थापित की गईं। इन प्रतिकृतियों को इतनी सजीवता से बनाया गया था कि उपस्थित भक्तों को वास्तव में यह आभास हुआ कि वे दक्षिण भारत के इन भव्य मंदिरों के ही दर्शन कर रहे हैं। कारीगरी इतनी अद्भुत और अद्वितीय थी कि लोग इसे देखकर अचंभित हो उठे। मंदिर के स्तंभों और पत्थरों पर वैसी ही बारीकी से कारीगरी की गई थी, जैसी इन भव्य मंदिरों में होती है।

शेषनाग पर विराजे भगवान और महालक्ष्मी के दर्शन
पाटोत्सव के दौरान भगवान शिव स्वयं शेषनाग के ऊपर विराजित थे और साथ में महालक्ष्मी के भव्य दर्शन भी भक्तों को कराए गए। मंदिर में सात दरवाजे बनाए गए थे, जहां भक्तों ने अपनी मनोकामनाएं मांगी। पूरे मंदिर प्रांगण में प्राकृतिक फूलों की मनमोहक महक फैली हुई थी, जिसमें लगभग 2100 किलो पुष्प मंदिर की सजावट में काम आए।

बारिश के बावजूद भक्तों की अपार भीड़ और उत्कृष्ट व्यवस्था

इस दौरान भगवान इंद्रदेव भी बड़े मेहरबान रहे और मौसम बड़ा ही आनंदित हो गया। हालांकि बारिश की विपरीत परिस्थितियों में भी डुंगरिया परिवार द्वारा व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संभाली गईं। भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी, जिसे व्यवस्थित करने के लिए कतारबद्ध दर्शनों हेतु बैरिकेड लगाए गए, जिससे सुलभ दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी।

कोषाध्यक्ष हंसराज धूत ने बताया कि इस वर्ष वॉलेट पार्किंग की व्यवस्था से सभी को सुविधा मिली और यातायात बाधित नहीं हुआ। ट्रस्ट द्वारा लगभग एक हजार चार पहिया वाहन और एक हजार दुपहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की गई थी। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मंदिर आने-जाने की विशेष व्यवस्था भी की गई थी।

भव्य आरती और महाप्रसादी

सायं 6:15 बजे संत रामप्रसाद बड़ा राम, सूरसागर के सानिध्य में भक्तों द्वारा भगवान की भव्य आरती की गई। प्रसादी की व्यवस्था में भी डुंगरिया मंदिर के समस्त कार्यकर्ता जुटे रहे। अनुमानतः 7000 से 8000 लोगों ने महाप्रसादी ग्रहण की।

आधुनिक सुविधाओं के साथ परंपरा का संगम

मंदिर में प्रवेश से पहले दर्पण की विशेष व्यवस्था थी, जिसमें आने वाले भक्तों ने अपने प्रतिबिंब को देखकर प्रसंचित मुद्रा में मंदिर में प्रवेश किया। परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाते हुए, मंदिर प्रांगण में मोबाइल कैमरे से फोटो लेना प्रतिबंधित रहा, वहीं स्कैनर के साथ सेल्फी जोन की व्यवस्था मंदिर के बाहर की गई थी, जहां युवक-युवतियों ने अपनी तस्वीरें लीं।

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