राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन ने किया विरोध प्रदर्शन, नर्सों ने उठाई भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग
नर्सिंग वर्ग में रोष, भविष्य में आंदोलन और उग्र रूप लेने की चेतावनी
जोधपुर। मथुरा दास माथुर अस्पताल के बाहर राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के तत्वावधान में गेट मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेज द्वारा 302 पदों पर हो रही निविदा नर्सिंग भर्ती के खिलाफ आवाज उठाना था। इस आंदोलन में अस्पताल के सैकड़ों नर्सेज ने भाग लिया।
जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह मेड़तिया ने कहा, "यह भर्ती एन आई सी यु और आई सी यू जैसे गंभीर रोगियों के उपचार हेतु की जा रही है। लेकिन भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय नहीं है, जिससे योग्य नर्सेज का चयन संदेहास्पद हो रहा है। यह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के समान है।"
संयोजक सुरेन्द्र चौधरी ने बताया कि पहले चरण में नर्सेज ने सभी चिकित्सालयों में 5 दिन काली पट्टी बांधकर आंदोलन किया था। अब दूसरे चरण में गेट मीटिंग्स का आयोजन किया जा रहा है। संघर्ष सहसंयोजक जगदीश जाट ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "निविदा प्रथा से जनता को मिल रही सेवा की गुणवत्ता में कमी आएगी और स्थाई नर्सिंग के पदों की बजाय ठेके पर नर्सिंग वर्ग को खत्म किया जा रहा है।"
उपसंयोजक बसंत रॉयल ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "पूरे नर्सिंग वर्ग में रोष है। बड़े स्तर पर फर्मों द्वारा ज्वाइनिंग के लालच और बोनस अंक की चाहत में भ्रष्टाचार की खबरें सामने आ रही हैं। इसलिए जनहित में निविदा भर्ती को रद्द कर स्थाई पदों में परिवर्तन करने की मांग की जा रही है।"
गेट मीटिंग में कई अन्य वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी, जिनमें श्री गोपाल व्यास, सीमा जोशी, राजेश विश्नोई, प्रेमलता चौधरी, शशी शर्मा, अन्जु अग्रवाल, नरेंद्र प्रजापत, प्रितम चौहान और घमंडाराम शामिल थे। सभी ने निविदा भर्ती से जनता को हो रहे नुकसान के बारे में चर्चा की।
नर्सिंग वर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कार्य बहिष्कार, रैली और अन्य उग्र आंदोलनों का सहारा लेंगे।

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