New front of Naxalite organizations: increasing economic influence through ganja smuggling नक्सली संगठनों का नया मोर्चा: गांजा तस्करी से आर्थिक दबदबा

नक्सली संगठनों का नया मोर्चा: गांजा तस्करी से बढ़ा रहा आर्थिक दबदबा

देशभर में फैला नेटवर्क, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

भारतमाला हाईवे बना तस्करों का नया रास्ता

जोधपुर। देश में नक्सलवाद से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन नक्सली संगठनों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक नया हथियार अपना लिया है – गांजे की तस्करी। उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना,  झारखंड और बिहार जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती हो रही है, इससे नक्सलियों को भारी मुनाफ़ा हो रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नक्सली संगठन ट्रक, कंटेनर, एंबुलेंस, किराना सामान और जानवरों के चारे जैसे विभिन्न तरीकों से गांजे की तस्करी कर रहे हैं। जनवरी से जुलाई 2024 के बीच ही 14,111 किलो गांजा जब्त किया जा चुका है, जो दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा था।


हाल ही में जोधपुर पुलिस ने एक लोडिंग टैक्सी में गांजा तस्करी करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। राजस्थान में एनसीबी की टीम भी गांजे की तस्करी के नेटवर्क का पता लगाने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। नक्सली उड़ीसा की शबरी नदी, मलकानगिरी और चांदमेटा नदी के किनारे चोरी-छिपे गांजे की खेती करते हैं और इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अपने संगठन को चलाने, हथियार खरीदने और अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में कर रहे हैं।

भारतमाला हाईवे: तस्करों का नया रूट:

गांजे की तस्करी के लिए नक्सली भारतमाला हाईवे का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इस हाईवे पर वाहनों की सघन जांच करना मुश्किल है, जिससे तस्करों को आसानी मिल रही है। यह रूट दक्षिण भारत से पंजाब तक गांजे की सप्लाई में मदद कर रहा है, जिसमें राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे शहर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

MD ड्रग और स्मैक की बढ़ती तस्करी:

गांजे के अलावा, मारवाड़ क्षेत्र में MD ड्रग और स्मैक की तस्करी में भी तेजी आई है। हाल ही में DCP राजर्षि राज के नेतृत्व में जोधपुर वेस्ट जिले की पुलिस ने मिशन संकल्प अभियान के तहत कई ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है।  पूछताछ में पता चला है कि गुजरात से सटे सांचौर और जालौर के रास्ते मारवाड़ और प्रदेश के अन्य हिस्सों में नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा रुख:

नक्सली नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। नक्सलियों के बैंक खातों को सीज किया जा रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन गांजे की तस्करी से नक्सलियों को नया आर्थिक आधार मिल गया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती और बढ़ गई है।  एजेंसियां अब गांजे की खेती से जुड़े अंतिम छोर के तस्करों तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।


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