जोधपुर में श्याम भक्ति सेवा संस्थान ने रचा इतिहास, देश के रक्षकों का किया सम्मान
राखी महोत्सव: देशभक्ति और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का अनूठा संगम
जोधपुर। रक्षाबंधन का त्यौहार एक अद्भुत भावनात्मक रंग में रंग गया। श्याम भक्ति सेवा संस्थान ने बीएसएफ मुख्यालय में एक भव्य "राखी महोत्सव" का आयोजन किया, जहाँ बड़ी संख्या में श्याम भक्तों ने सीमा पर तैनात वीर जवानों की कलाई पर राखी बांधकर श्याम भक्त अभिभूत हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्ष मोनिका प्रजापत ने की। श्याम भक्ति सेवा संस्थान के सचिव राजकुमार रामचंदानी ने बताया कि संस्थान के सदस्यों ने परंपरागत तरीके से जवानों की आरती उतारी, तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और फिर हाथों से बनाई गई राखियाँ बांधीं। इन राखियों में देशभक्ति का भाव झलकता था।
इस भावुक आयोजन में बीएसएफ जवान अत्यंत अभिभूत दिखे। कई जवानों की आँखों में खुशी के आँसू छलक पड़े, क्योंकि यह आयोजन उन्हें उनके परिवार और घर की याद दिला गया। उन्होंने श्याम भक्ति सेवा संस्थान के इस नेक काम के लिए आभार व्यक्त किया।
समारोह में बड़ी संख्या में बीएसएफ के जवानों के साथ-साथ अधिकारी कैलाशचंद यादव, मुकेश कुमार यादव, शिव कुमार पटेल, कमलेश रोलानिया, मानसिंह राठौड़, आर के मीणा, राकेश पटेल आदि उपस्थित थे। श्याम भक्ति सेवा संस्थान के कई सदस्यों ने भी इस आयोजन में भाग लिया, जिनमें कन्हैया लाल सबनानी, प्रभांशु जोशी, निश्चल सोलंकी, नेहा असवानी, पूजा भाटी, तेज कंवर सांखला, तन्मय भाटी, मनीष भाटी, लक्की गोयल, ऋषि प्रजापत, नवीन भाटी, नितिन आचार्य, मोहित हेड़ा, रामेश्वर जांगिड़, पुखराज जांगिड़, दमयंती जांगिड़, ललिता प्रजापत, धनेश प्रजापत, प्रिया जांगिड़, पूजा जांगिड़, भूमित्र जोशी, अक्षिता राजपुरोहित, भवानी राजपुरोहित, मनीष पंवार, विवान भाटी, अथर्व भाटी और मनीष गहलोत शामिल हैं।
संस्था अध्यक्ष मोनिका प्रजापत ने कहा कि यह आयोजन देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक प्रयास था। सीमा सुरक्षा बल, जोधपुर मुख्यालय के आई जी एम. एल. गर्ग ने अपने संदेश में कहा कि सैनिकों को समाज का यह स्नेह और सहयोग नई ऊर्जा प्रदान करता है। साध्वी प्रीति प्रियवंदा और राजस्थान राज्य संस्कृत अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ जया दवे ने भी अपने संदेशों में इस आयोजन की सराहना की।
श्याम भक्ति सेवा संस्थान के सचिव ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य सामाजिक और राष्ट्रहित के कार्यों में योगदान देना है और ऐसे आयोजन भविष्य में भी जारी रहेंगे। यह राखी महोत्सव सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि देश के वीर सैनिकों के प्रति गहरे सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है।


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